विधि
- एक छोटे बर्तन में गुड़ और पानी डालकर धीमी आँच पर रखें। चलाते रहें जब तक गुड़ पूरी तरह घुलकर गहरे रंग की कैरामेल जैसी चाशनी न बन जाए। थोड़ा ठंडा होने दें।
- एक बड़े कटोरे में अंडों को तब तक फेंटें जब तक वे हल्के रंग के और झागदार न हो जाएँ। फिर नारियल का दूध, इलायची, जायफल, दालचीनी, गुलाबजल और नमक मिलाकर अच्छी तरह फेंटें।
- घुले हुए गुड़ को धीरे-धीरे अंडे के मिश्रण में डालते जाएँ और लगातार फेंटते रहें। एक बारीक छलनी से छानकर साफ़ कटोरे में निकाल लें ताकि कोई भी पका हुआ अंडा या बिना घुला गुड़ अलग हो जाए।
- मिश्रण को गर्मी सहने वाले एक कटोरे में या 6 छोटे रामेकिन में डालें। ऊपर से कटे हुए काजू और किशमिश छिड़कें।
- स्टीमर में तेज़ खौलता पानी तैयार करें। कटोरे को (या रामेकिन को) स्टीमर में रखें। ऊपर से ऐल्युमिनियम फ़ॉइल से ढक दें जिसमें कुछ छेद कर दिए हों — इससे भाप का पानी कस्टर्ड पर वापस नहीं टपकेगा।
- मध्यम-धीमी आँच पर 45–55 मिनट तक भाप में पकाएँ (तेज़ उबाल से कस्टर्ड में गड्ढे पड़ जाते हैं) — सींक डालकर देखें, साफ़ निकलनी चाहिए। परोसने से पहले पूरी तरह ठंडा करें — वतलप्पम कमरे के तापमान पर सबसे अच्छा लगता है, और रात भर फ्रिज में रखकर तो और भी बेहतर।
सांस्कृतिक संदर्भ
वतलप्पम श्रीलंकाई-मलय मिठाई है — 17वीं–18वीं सदी में मलय मुस्लिम सैनिक और व्यापारी इसे श्रीलंका लेकर आए (जब श्रीलंका पहले डच और फिर ब्रिटिश उपनिवेश था और मलय लोगों को मज़दूर के रूप में लाया जाता था)। मूल रूप से यह इंडोनेशियाई 'सेरी कया' था जो विकसित होकर श्रीलंका का गाढ़ा, गुड़ से भरपूर संस्करण बन गया। यह ईद-उल-फ़ितर (रमज़ान के अंत) और ईद-उल-अज़हा के उत्सव की मिठाई है, हर श्रीलंकाई मुस्लिम घर में बनती है; गैर-मुस्लिम श्रीलंकाई परिवार भी इसे क्रिसमस और नए साल पर बनाते हैं। किथुल गुड़ — किथुल ताड़ के रस से बना — इसका अपूरणीय अंग है।