विधि
- एक चौड़े पैन में 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल गरम करें। बोरी (दाल के बड़े) को 4 मिनट तक हल्के सुनहरे होने तक तलें; निकाल लें।
- उसी तेल में करेले की स्लाइस को 4 मिनट तक नर्म और थोड़ा कड़वी-सुगंधित होने तक तलें; निकाल लें।
- बचा सरसों का तेल गरम करें। पाँच फोरण और बारीक कटा अदरक डालकर 30 सेकंड चटकाएँ।
- बची सब्ज़ियाँ (सहजन, बैंगन, शकरकंद, कच्चा केला, मूली) डालें। मसालेदार तेल में लपेटने के लिए 4 मिनट चलाएँ।
- हल्दी, नमक, सरसों की पेस्ट, खसखस की पेस्ट और 300 मिली पानी डालें। उबाल लाकर ढककर 12 मिनट पकाएँ जब तक सब्ज़ियाँ नर्म न हो जाएँ।
- दूध धीरे-धीरे डालते हुए चलाएँ। तली बोरी और करेला डालें। 4 मिनट और पकाएँ; ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी होगी। अंतिम चमक के लिए घी मिलाएँ। बंगाली दोपहर के भोजन के पहले पाठ्यक्रम के रूप में परोसें — शुक्तो की कड़वाहट बाक़ी भोजन से पहले स्वाद को खोलती है।
सांस्कृतिक संदर्भ
शुक्तो पारंपरिक बंगाली दोपहर के भोजन का पहला पाठ्यक्रम है — बंगाली भोजन कई पाठ्यक्रमों में संरचित होते हैं, शुक्तो (कड़वा) से शुरू होकर, फिर दाल-और-भाजा (हल्के), फिर मछली की करियों के माध्यम से, चटनी और मिठाई पर समाप्त। कड़वी शुरुआत पाचन दर्शन है: कड़वा स्वाद को सक्रिय करता है। हर बंगाली घर की पसंदीदा शुक्तो सब्ज़ियाँ हैं; निरंतर तत्व करेला, सहजन और बोरी हैं। सरसों-खसखस की ग्रेवी बंगाली पहचान है — न मसालेदार करी, न हल्का दूध सूप, बल्कि बीच की कोई चीज़।