विधि
- मटन को दही, अदरक-लहसुन के पेस्ट, दो-तिहाई बिरस्ता, बिरयानी मसाला, कश्मीरी मिर्च और नमक में मैरीनेट करें। 4 घंटे, बेहतर हो तो रात भर रखें।
- साबुत मसालों (हरी इलायची, लौंग, तेज़ पत्ता, दालचीनी, शाही जीरा) के साथ 4 लीटर नमकीन पानी उबालें। भीगा बासमती डालें और ठीक 5 मिनट उबालें — चावल 70% पका होना चाहिए। पानी निकाल दें।
- एक भारी बर्तन में नीचे मैरीनेट किया मटन फैलाएँ। 50 मिली घी ऊपर से डालें।
- आलू बुख़ारा और तले आलू मटन की परत में दबाएँ। ऊपर पाँच जगहों पर केसर वाला दूध डालें।
- अधपका चावल ऊपर से परत में डालें। बचा हुआ घी छिड़कें, बचा बिरस्ता और केवड़ा जल डालें।
- आटे की लोई को लंबी रस्सी में बेलें; बर्तन के किनारों पर दबाकर ढक्कन सील करें। तेज़ आँच पर 5 मिनट तक रखें, फिर सबसे धीमी आँच पर 60 मिनट तक पकाएँ। आँच से उतारकर 15 मिनट विश्राम दें। सील ध्यान से तोड़ें। बिरयानी को नीचे से ऊपर की ओर हल्के हाथ से उठाएँ ताकि परतें दिखती रहें। रायते, सलाद और बगल में बोरहानी पेय के साथ परोसें।
सांस्कृतिक संदर्भ
ढाका कच्ची बिरयानी शहर का पहचानी हुई व्यंजन है — हैदराबादी (अधिक सूखी और तीखी) और कराची (भी अधिक तीखी) बिरयानी से अलग। पुराने ढाका के विशेष रेस्तराँ — कशीश, हाजी का, झोनान ख़ान — मटन कच्ची बिरयानी को लगभग धार्मिक भोजन की तरह परोसते हैं, सप्ताहांत में खाने वाले कतार में लगते हैं। कच्ची (कच्चे-मैरीनेट) तकनीक तकनीकी पहचान है। बोरहानी — मसालेदार दही पेय — अनिवार्य साथी है। बिना बोरहानी के ढाका की शादी तकनीकी रूप से अधूरी है।